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जिन्दगी

कितनी अरमानों से निकली
तू।


कितनों अरमानों से खेली
तू।


ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।


अपनों से अनजानों तक
शहर से विरानों तक,
क्या – क्या मंजर ना देखी
तू।


कभी तन्हाई में ,कभी महफ़िल में,
जाने क्या – क्या पापड़ बेली
तू।


कभी तूफानों से ,कभी अरमानों से,
ना जाने कितनों की जिन्दगी से खेली
तू।

कितनी अरमानों से निकली
तू।

कितनों अरमानों से खेली
तू।


ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।

कभी पत्थरों के शहर से, कभी बागों से,

जाने किस – किस मुकाम से गुजरी
तू।

मेरे विचारों ,मेरे जज्बातों ,मेरे वसूलों से फिसली

तू

कितनी अरमानों से निकली
तू।

कितनों अरमानों से खेली
तू।

ऐ जिन्दगी जीने के लिए
क्या – क्या नहीं झेली
तू।

ख़ामोश जिन्दगी

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,
     क्या बात है?

हर बात में ठंडी आहें,
     क्या बात है?

रात को तारें गिनना,
    गिनकर यूं मुस्कुराना,
          क्या बात है?

राह चलते – चलते यूं गिर पड़ना,
        गिर कर फिर संभल जाना,
                क्या बात है?

जुबां से कोई बात नहीं निकलती,
        दिल के अरमान दबा के बैठे हैं,
                क्या बात है?

जमाने के दर्द को समेटे बैठे है,
        फिर भी आप ऐंठे बैठे है,
               क्या बात है?

क्यूं खामोश है जिन्दगी ,
        क्या बात है?

हर बात में ठंडी आहें,
        क्या बात है?

हालाते शहर देखकर यूं गुम है,
        जज्बातें दर्द बयां नहीं होता,
              क्या बात है?

खामोशी से हर रास्ते नापता गया,
        ये सफर का थकान,
              क्या बात है?

जिन्दगी

जिन्दगी के इस इम्तहान में कौन जीतेगा कौन हारेगा?
पर मजा तो उसे ही आएगा जो किनारे पे बैठ के देखेगा।

रोक लो खुद को कुछ भी कहने से पहले,
आज उसकी तो कल तेरी भी आनी है।

जिन्दगी में सब्र का क्या मोल है,

ये तो उसी को पता है ,जिसने सब्र कर रखा है।

जिन्दगी सबक सिखाने में ,समय का साथ देती है,
अरे ! तू नहीं समझा तेरा इम्तहान लेती है।

जिन्दगी की सच्चाई को उसी ने जाना है,
जिसने अपने आप पे काबू कर पाया है।

वक्त हर समय चलता ही रहता है,

बचपन को लेकर चलते हैं, और

बुढ़ापा आ ही जाता है।

कभी कभी ऐसा लगता है ,वक्त ठहर सा गया है,
लेकिन ये वक्त नहीं ,अपनी सोच है ,यारों।

तू लाख दुहाई दे वक्त को ,
ये वक्त है ये बदलेगा , जरूर।

जिन्दगी उसी की है जिसने ये जाना है ,

कल पर छोड़ना नहीं अपने आज को।

और अंत में

कुछ अच्छे कार्य करने के लिए,

समय मत देखो, यारों,नहीं तो,

तू सोचता ही रह गया और तेरा समय आ गया ……..